कोरोना महासंकट के दौर में खेती-किसानी के लिए हरसंभव राहत पहुंचाने पर जोर

कोरोना महासंकट के दौर में खेती-किसानी के लिए हरसंभव राहत पहुंचाने पर जोर

कृषि मंत्रालय ने इस वैश्विक महामारी के दौर में किसानों को जो छूट दी गयी है अपनी खेती-किसानी के काम को देखते हुए, ताकि देश में खाने-पीने के सामानों की कमी नहीं रहे. इसके लिए कृषि मंत्रालय ने किसानो के लिए हरसंभव राहत देने की घोषणा की गयी है. इस सम्बन्ध में और अधिक विस्तार से पढने के लिए नीचे के इस सुचना को पढ़ें:
कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
कोरोना महासंकट के दौर में खेती-किसानी के लिए हरसंभव राहत पहुंचाने पर जोर

राज्यों के कृषि मंत्रियों ने किसान हित में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के प्रयासों की प्रशंसा की

फसल कटाई पश्चात सभी राज्य उपार्जन के कार्यों को सुचारू रूप से संपन्न कराएं-श्री तोमर

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने राज्यों के कृषि मंत्रियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग से की चर्चा

राज्यों के अनुरोध पर उपार्जन समय-सीमा में छूट देकर 90 दिनों में पूर्ण करने को कहा

मंडियों के बाहर कृषि उपज बेचने के लिए राज्यों से APMC एक्ट में ढील देने का अनुरोध

भीड़ नहीं होने देने के लिए किसानों को एसएमएस, व्हाट्सएप से पूर्व सूचना दी जाएं

किसान चाहे तो एफपीओ, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उत्पादों की होम डिलीवरी करवाएं

किसानों को एमएसपी का भुगतान करने हेतु सभी राज्य पर्याप्त “रिवाल्विंग फंड” बनाएं

राज्य भी कंट्रोल रूम बनाकर केंद्रीय कृषि कंट्रोल रूम के साथ पूर्ण समन्वय बनाए रखें

08 APR 2020
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को राज्यों के कृषि मंत्रियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विस्तृत चर्चा की। इस दौरान मुख्य रूप से कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण उत्पन्न संकट के दौर में खेती-किसानी के लिए हरसंभव राहत पहुंचाने पर जोर दिया गया। श्री तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के लिए अधिकतम छूट दे दी है, जिसका लाभ लेकर फसल कटाई का जितना काम कर लिया गया, वह हमारे किसानों और गांवों की ताकत का प्रकटीकरण है। अब राज्यों को चाहिए कि वह फसल कटाई के बचे हुए काम के साथ ही उपार्जन कार्य सुचारू रूप से संपन्न कराए। इस दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने, किसानों को परेशानी नहीं होने देने, उऩ्हें कहीं दूर नहीं जाना पड़े, यह सब गंभीरता से देखा जाएं। सभी राज्य भी कंट्रोल रूम बनाकर केंद्रीय कृषि मंत्रालय के कंट्रोल रूम के साथ पूरा समन्वय बनाए रखें ताकि विशेषकर, अंतरराज्यीय परिवहन की समस्या ना आएं।
      केंद्रीय कृषि मंत्रालय से हुई नेशनल वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला तथा श्री कैलाश चौधरी एवं केंद्रीय कृषि सचिव श्री संजय अग्रवाल भी मौजूद थे, जिन्होंने लॉकडाउन से किसानों के लिए दी गई छूट व राज्यों को भेजे दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। केंद्र सरकार द्वारा छूट देने का उद्देश्य यह है कि किसानों को कृषि उपज मंडियों में लाने की जरूरत नहीं पड़े और वे परेशान न हो। वेयर हाऊसों से ही कृषि उपज की बिक्री सुविधाजनक तरीके से की जा सकती है। श्री तोमर ने राज्यों के कृषि मंत्रियों का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि लॉकडाउन के प्रारंभिक दौर में सब्जी मंडियों में सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा गया था, ऐसे में राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कृषि उपज की बिक्री के दौरान भीड़ नहीं लगे और कोई अव्यवस्था नहीं हो।
राज्यों के कृषि मंत्रियों ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि छूट दिए जाने से किसानों को काफी मदद मिली है। श्री तोमर ने राज्यों के अनुरोध पर 30 अप्रैल तक दलहन-तिलहन के उपार्जन की निर्धारित समय-सीमा में छूट देते हुए, यह कार्य कभी भी प्रारंभ करके 90 दिनों में पूर्ण करने को कहा है। दलहन के बीज 8 साल के बजाय 10 साल तक वाले उपयोग करने के, राज्यों के आग्रह पर उन्हें यह भी छूट तत्काल दे दी गई। श्री तोमर ने कहा कि यदि कोई किसान एफपीओ या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से होम डिलीवरी कर उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाना चाहते है तो इसमें सहायता की जाएं। बैठक के दौरान, राज्यों में उचित सुरक्षा उपायों के साथ उपज खरीद की व्यवस्थाएं करने को कहा गया। श्री तोमर ने कोविड-19 के चलते सभी राज्यों से कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) अधिनियम में ढील देने का अनुरोध किया,  ताकि किसान अपनी उपज मंडियों के बाहर और बिना परेशानी के बेच सकें। साथ ही राज्यों से निवेदन किया है कि वे मंडी टैक्स अभी ना लें। खरीद केंद्रों पर भीड़ कम करने के लिए, मध्यप्रदेश की तरह, मंडी के रूप में घोषित करके गोदामों में खरीद केंद्र खोलने को कहा। साथ ही कहा गया कि किसानों को एमएसपी का भुगतान करने के लिए म.प्र. व राजस्थान की तर्ज पर सभी राज्य पर्याप्त “रिवाल्विंग फंड” बनाएं और वेयर हाउस रसीदें (डब्ल्यूएचआर) जनरेट करें तथा रिपोर्ट ऑनलाइन करें। पिछली उपलब्ध जानकारी से मिलान करते हुए किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण करें। किसानों को तत्संबंधी सूचनाएं एसएमएस/व्हाट्सएप के माध्यम से अग्रिम दे दी जाएं, ताकि वे उसी अनुरूप बिना भीड़ लगाए खरीद केंद्रों पर जाएं। खरीद केंद्रों के पास पर्याप्त गोदामों की जगह की व्यवस्था राज्य एजेंसी द्वारा की जाना चाहिए। खरीद केंद्रों से भंडारण बिंदुओं तक स्टॉक उठाने के लिए ट्रांसपोर्टरों की पूर्व व्यवस्था करना होगी। सरकार का आदेश किसानों, परिवहन के संबंधित साधनों, श्रमिक, कर्मचारियों, गोदामकर्मियों, सेवाप्रदाताओं, राज्य व प्राथमिक स्तर के जुड़े हुए कर्मियों आदि की निर्बाध आवाजाही के लिए है, जो खरीद कार्यों में शामिल रहेंगे।
बागवानी की खराब होने वाली वस्तुओं के विपणन के लिए एफपीओ/पीएसीएस, अन्य किसान संगठनों को सभी चैनलों (एपीएमसी, रिटेल चेन, थोक बाजार और प्रोसेसर्स) का उपयोग करने के लिए समर्थन किया जाएं। किसानों द्वारा अगले महीनों के दौरान तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने हेतु लघु अवधि की फसलें उगाई जा सकती है। गर्मियों की सब्जियों की बुवाई और रोपण में देरी, आने वाले बारिश के मौसम में आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। इस तरह के बेल्ट में इन फसलों के क्षेत्र विस्तार को बीज किट और सब्जी के पौधे की आपूर्ति को बढ़ावा देने की जरूरत है। श्री तोमर ने बताया कि 16 अप्रैल को वीडियो कांफ्रेंसिंग से खरीफ कांफ्रेंस भी की जाएगी ताकि खरीफ की कार्ययोजना बनाई जा सकें। उन्होंने सभी से आरोग्य सेतु एप का उपयोग करने का आग्रह किया एवं इस एप के प्रचार के लिए भी कहा ताकि कोरोना महामारी से निपटने में मदद मिल सकें।



Source: PIB

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